Wednesday, June 10, 2015

हाँ मैं हिन्दू हूँ.....

एक कविता जो मुझे बेहद पसंद आयी.
ब्राहमण भी मैं हूँ..
जाट भी में हु...
क्षत्रिय भी मैं हुँ..
राजपुत और मराठा भी मैं हुँ..
हिला कर रख दे जो दुष्टोँ की हस्ती..
तूफान ओर ज्वारभाटा भी मैँ हूँ...!!!!
बाल्मीकि भी मैं हूँ.....
विदुर नीति भी मैं हुँ..
दुष्ट सिकन्दर को हराने वाला
पौरूष भी मैं हुँ...
सर्वश्रैष्ठ गुरू चाणक्य भी मैं हुँ..
वीर अर्जुन भी मैं हूँ...
परशुराम भी मैं हूँ...
मुरलीधर मनोहर श्याम भी मैं हूँ..
एक वचन की खातिर
वनवासी बननेवाला
मर्यादा पुरूषोतम श्रीराम भी मैं हूँ..!!!
शिवाजी और प्रताप भी मैं हुँ..
धधकती है जो जुल्म देखकर
'हिन्दुत्व'' नामकी आग भी मैं हुँ..
हाँ मैं हिन्दू हूँ...
जात पात मैं ना बाँटो मुझको...
मैं दुनिया का केन्द्र बिन्दु हुँ...
हाँ मैं हिन्दू हूँ.....

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